65 अरब डॉलर का आयात तो सिर्फ तेल का होता है और 55 अरब डॉलर का आयात होता है इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स का

 *65 अरब डॉलर का आयात तो सिर्फ तेल का होता है और 55 अरब डॉलर का आयात होता है इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स का।* 


*और इन दोनों मदों का भारत में कुल आयात का हिस्सा 70% से ज्यादा है। अब मोढ़ी ने 2030 तक आयल इम्पोर्ट को एक चौथाई से भी कम करने के लिए बिजली से चलने वाले वाहनों के उत्पादन करने के लिए कमर कस ली है और सभी ऑटो मैन्युफैक्चररस को इसके लिए नोटिस भी जारी कर दिया है।*


*वहीं दूसरी और सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग में ही भारत ने 2 ट्रिलियन डॉलर का 2025 तक मैन्युफैक्चरिंग का लक्ष्य रखा है जिसमें से सिर्फ एक साल में ही 20% को अचीव भी कर लिया है। आज मोबाइल्स, लैपटॉप, एयर कंडीशनर, फ्रिज, इलेक्ट्रिकल सामान, बैटरीज और अब तो सेमी कंडक्टर्स तक भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग होने लगी हैं। सिर्फ सोलर सेल्स और सेमी कंडक्टर्स की ही बात करें तो मोदी सरकार भारत मे इसका 2 ट्रिलियन डॉलर्स का प्रोडक्शन करना चाहती है।*


*5 ट्रिलियन डॉलर्स की इकोनॉमी का सपना दिखाने वाली मोदी सरकार का मजाक बनाने वाले कुत्ते बिल्लों की बाट भी जल्दी लगने वाली है। क्योंकि यह टारगेट तो 2025 से पहले ही अचीव कर लिया जाएगा। शायद 2024 के चुनावों से भी पहले।*


*पहले कोरोना और अब तालीबान ने समय अवधि को रोकने की कोशिश की पर मोदी तो जैसे रबड़ का बना आदमी है उसने उंस अवधि को ही खींच कर लंबा कर लिया।*   


सही कहना है मोदी का - आपदा में अवसर ढूंढने वाले को ही मुकद्दर का सिकंदर कहतें हैं और मोदी यह हुनर अच्छे से जनता है।

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